कमलनाथ ने राज्यपाल को सौपा इस्तीफा

भोपाल। मध्य प्रदेश में कई दिनों से सियासी महासंग्राम शुक्रवार को अपने नतीजे पर पहुंच गया। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद आज (20 मार्च) होने वाले फ्लोर टेस्ट से पहले ही कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने का ऐलान किया है।  राज्यपाल लालजी टंडल से कर  अपना त्यागपत्र उन्हें सौंपा  । बता दें कि पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया सहित 22 विधायकों के इस्तीफे के बाद से कमलनाथ सरकार पर संकट के बादल छाए हुए थे।

पत्रकारवार्ता में शुक्रवार को कमलनाथ ने बड़ा ऐलान करते हुए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। कमलनाथ ने भावुक स्वर में कहा, 15 महीनों में मेरा प्रयास रहा कि हम प्रदेश को नई दिशा दें, प्रदेश की तस्वीर बदलें। मेरा क्या कसूर था? इन 15 महीनों में मेरी क्या गलती थी? बीजेपी सोचती है कि मेरे प्रदेश को हराकर के खुद जीत जाएगी। तो वे ऐसा कभी नहीं कर सकतें। बता दें कि इस्तीफे के ऐलान से पहले कमलनाथ के आवास पर कांग्रेस विधायक दल की बैठक हुई जिसमें यह कयास लगाया जा रहा था कि विधानसभा में आज होने वाले फ्लोर टेस्ट को लेकर चर्चा हो सकती है।
फ्लोर टेस्ट से पहले ही मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पद से कमलनाथ के इस्तीफा देने से बड़ा सियासी बवाल मच गया है। कांग्रेस ने इसके पीछे भारतीय जनता पार्टी को जिम्मेदार ठहराया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में कमलनाथ ने अपनी सरकार का रिपोर्ट कार्ड पेश किया है। उन्होंने बीजेपी के 15 साल से तुलना करते हुए कहा कि उन्हें जनता से 5 साल के लिए चुना था, लेकिन उन्हें 15 महीने ही काम करने दिया गया। कमलनाथ ने कहा, बीजेपी को 15 साल मिले थे। आज तक मुझे केवल 15 महीने मिले।
कमलनाथ ने आगे कहा, ढाई महीने लोकसभा चुनाव और आचार संहिता में गुजरे। इन 15 महीनों मे राज्य का हर नागरिक गवाह है कि मैंने राज्य के लिए जन हितैषी कार्य किया। लेकिन बीजेपी को ये काम रास नहीं आए और उसने हमारे खिलाफ निरंतर काम किया। भाजपा पर निशाना साधते हुए कमलनाथ आगे कहते हैं कि बीजेपी पहले दिन से ही षड्यंत्र कर रही है। प्रदेश के साथ धोखा करने वाली बीजेपी को जनता माफ नहीं करेगी।

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